यूपी के परिषदीय स्कूलों में नया बदलाव, अगस्त से हर शनिवार होगा ‘बैगलेस डे’, बच्चों को पढ़ाई के साथ मिलेंगे हुनर
उत्तर प्रदेश के परिषदीय स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के लिए इस शैक्षिक सत्र से पढ़ाई का तरीका थोड़ा अलग और ज्यादा रोचक होने जा रहा है। अब बच्चों को हर समय किताबों और कॉपियों तक सीमित रखने के बजाय उन्हें ऐसी गतिविधियों से जोड़ा जाएगा, जिनसे वे अपने आसपास की दुनिया को समझ सकें और जीवन से जुड़े जरूरी कौशल सीख सकें। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के तहत प्रदेश के परिषदीय उच्च प्राथमिक विद्यालयों, कंपोजिट विद्यालयों और कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में इस शैक्षिक सत्र से 10 बैगलेस डे आयोजित किए जाएंगे। अगस्त से नवंबर तक प्रत्येक शनिवार को विद्यार्थियों के लिए गतिविधि आधारित शिक्षण कराया जाएगा। यानी शनिवार का दिन बच्चों के लिए केवल किताबों से पढ़ाई करने के बजाय कुछ नया सीखने और करके समझने का अवसर लेकर आएगा।
बैगलेस डे का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इस पहल का मुख्य उद्देश्य बच्चों को अनुभवात्मक, गतिविधि आधारित और कौशलपरक शिक्षा से जोड़ना है। अक्सर बच्चे किताब में किसी विषय को पढ़ तो लेते हैं, लेकिन जब उसे वास्तविक जीवन में देखने या करने का मौका मिलता है तो वह जानकारी उनके लिए ज्यादा आसान और यादगार बन जाती है। बैगलेस डे में इसी सोच को ध्यान में रखा गया है। बच्चों को मिट्टी के खिलौने बनाने, किचन गार्डन तैयार करने, जैविक खेती समझने, जल संरक्षण के तरीके जानने और स्थानीय हस्तशिल्प से परिचित होने जैसी गतिविधियों में शामिल किया जाएगा। इसके साथ ही उन्हें एक जिला-एक उत्पाद यानी ओडीओपी, आत्मनिर्भर भारत और वोकल फॉर लोकल जैसी अवधारणाओं के बारे में भी जानकारी दी जाएगी।
34 गतिविधियों वाला आनंदम मॉड्यूल तैयार
बैगलेस डे के संचालन के लिए राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद यानी एससीईआरटी ने 34 गतिविधियों वाला आनंदम मॉड्यूल तैयार किया है। इस मॉड्यूल को तीन प्रमुख हिस्सों में बांटा गया है। इसमें विज्ञान, पर्यावरण एवं प्रौद्योगिकी, सार्वजनिक कार्यालय एवं स्थानीय उद्योग तथा कला, संस्कृति एवं इतिहास जैसे विषय शामिल हैं। इन गतिविधियों का उद्देश्य बच्चों के अंदर जिज्ञासा पैदा करना और उन्हें अपने अनुभवों से सीखने का अवसर देना है। इसके लिए प्रदेश स्तर पर 28.94 करोड़ रुपये की धनराशि जारी की गई है और प्रत्येक विद्यालय को गतिविधियों के संचालन के लिए 6,500 रुपये दिए जाएंगे।
मिट्टी के खिलौने से लेकर जैविक खेती तक सीखेंगे बच्चे
बैगलेस डे के दौरान बच्चों को अलग-अलग तरह की गतिविधियों में भाग लेने का मौका मिलेगा। कुछ विद्यार्थी मिट्टी से खिलौने बनाएंगे तो कुछ जूट से उपयोगी वस्तुएं तैयार करना सीखेंगे। पर्यावरण से जुड़ी गतिविधियों में किचन गार्डन, जैविक खेती और जल संरक्षण को शामिल किया गया है। इससे बच्चों को पौधों की देखभाल, पानी की बचत और पर्यावरण संरक्षण के बारे में व्यावहारिक जानकारी मिल सकेगी। विज्ञान के क्षेत्र में विद्यार्थी विज्ञान मॉडल तैयार करेंगे और प्रयोगों के माध्यम से नई चीजों को समझेंगे। इस तरह की गतिविधियां बच्चों के अंदर वैज्ञानिक सोच विकसित करने में मदद कर सकती हैं।
Students will also learn AI, robotics and coding
इस पहल में आधुनिक तकनीक को विशेषशेष जगह दी गई है। बच्चों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई, रोबोटिक्स, स्क्रैच कोडिंग और ड्रोन तकनीक जैसी चीजों से परिचित कराया जाएगा। आज तकनीक तेजी से हमारे जीवन का हिस्सा बन रही है। ऐसे में बच्चों को शुरुआती स्तर पर तकनीकी दुनिया की जानकारी देना उनके भविष्य के लिए उपयोगी हो सकता है। खासकर ग्रामीण और छोटे शहरों के बच्चों को यदि स्कूल स्तर पर ही आधुनिक तकनीक को समझने और उससे जुड़े प्रयोग करने का अवसर मिलता है, तो उनमें नई चीजें सीखने की रुचि बढ़ सकती है।
There will also be a visit to the bank and post office
बैगलेस डे में बच्चों को केवल स्कूल की चारदीवारी के भीतर ही सीखने तक सीमित नहीं रखा जाएगा। मॉड्यूल में बैंक और डाकघर के भ्रमण जैसी गतिविधियों को भी शामिल किया गया है। ऐसे भ्रमण बच्चों को वास्तविक जीवन की व्यवस्था समझने में मदद करेंगे। बैंक में खाते और लेनदेन से जुड़ी सामान्य जानकारी, डाकघर की कार्यप्रणाली और सार्वजनिक सेवाओं के बारे में बच्चों को प्रत्यक्ष अनुभव मिल सकता है। इसी तरह मिनी बैंक और उद्यमिता जैसी गतिविधियों के जरिए विद्यार्थियों में शुरुआती वित्तीय समझ और व्यवसाय से जुड़ी सोच विकसित करने का प्रयास किया जाएगा।
स्थानीय उद्योग और ओडीओपी से जुड़ेंगे बच्चे
स्थानीय उद्योगों और हस्तशिल्प से बच्चों को जोड़ना भी इस कार्यक्रम की एक महत्वपूर्ण विशेषता है। उत्तर प्रदेश के अलग-अलग जिलों की अपनी अलग पहचान और विशेष उत्पाद हैं। कहीं कोई खास हस्तशिल्प प्रसिद्ध है तो कहीं कोई स्थानीय उत्पाद लोगों की आजीविका का बड़ा आधार है। बच्चों को स्थानीय उद्योगों का दौरा कराने और वहां काम करने वाले लोगों की कार्यप्रणाली समझाने से उन्हें यह पता चलेगा कि उनके आसपास रोजगार के कितने अवसर मौजूद हैं। इसके साथ ही उनमें स्थानीय उत्पादों के प्रति सम्मान और वोकल फॉर लोकल की भावना विकसित हो सकती है।
स्वास्थ्य और चाइल्ड सेफ्टी पर भी रहेगा ध्यान
कार्यक्रम में बच्चों के स्वास्थ्य और सुरक्षा से जुड़े विषयों को भी शामिल किया गया है। स्वास्थ्य और चाइल्ड सेफ्टी से जुड़ी गतिविधियों के जरिए विद्यार्थियों को अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखने और सुरक्षित रहने के तरीकों के बारे में जानकारी दी जाएगी। बच्चों को यह समझाना जरूरी है कि पढ़ाई के साथ उनका शारीरिक स्वास्थ्य और सुरक्षा भी महत्वपूर्ण है। छोटी उम्र में मिली सही जानकारी बच्चों को कई परिस्थितियों में समझदारी से निर्णय लेने में मदद कर सकती है।
संगीत, नाटक और फोटोग्राफी से निखरेगी प्रतिभा
कला, संस्कृति और रचनात्मकता को भी बैगलेस डे में खास स्थान दिया गया है। डूडलिंग, संगीत, नाटक और फोटोग्राफी जैसी गतिविधियों के जरिए बच्चों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलेगा। हर बच्चा पढ़ाई के हर विषय में एक जैसा प्रदर्शन नहीं करता। किसी बच्चे की रुचि विज्ञान में होती है, किसी की चित्रकला में, तो किसी को संगीत या अभिनय पसंद होता है। गतिविधि आधारित शिक्षा ऐसे बच्चों को अपनी प्रतिभा सामने लाने का मौका देती है। इससे उनके आत्मविश्वास में भी बढ़ोतरी हो सकती है।
ऐतिहासिक स्थलों और सार्वजनिक सुविधाओं को समझेंगे विद्यार्थी
इतिहास और समाज को समझने के लिए ऐतिहासिक स्थलों का भ्रमण और सार्वजनिक अवसंरचना के अध्ययन जैसी गतिविधियां भी प्रस्तावित हैं। जब बच्चे किसी ऐतिहासिक स्थान को किताब में पढ़ने के बजाय अपनी आंखों से देखते हैं तो उनके लिए इतिहास को समझना ज्यादा आसान हो जाता है। इसी तरह सड़क, पुल, जल व्यवस्था और अन्य सार्वजनिक सुविधाओं का अध्ययन करके वे यह जान सकते हैं कि समाज के विकास में इनका क्या महत्व है।
14 नवंबर को होगा बाल मेला
बैगलेस डे के तहत 14 नवंबर को सभी विद्यालयों में बाल मेला भी आयोजित किया जाएगा। बाल मेला बच्चों के लिए अपनी प्रतिभा और पूरे साल की गतिविधियों से सीखी गई चीजों को प्रदर्शित करने का अवसर होगा। बच्चे अपने बनाए मॉडल, हस्तशिल्प, कला सामग्री और अन्य रचनात्मक कार्यों को प्रदर्शित कर सकते हैं। इससे उनमें मंच पर अपनी बात रखने, दूसरों के साथ मिलकर काम करने और अपनी मेहनत को लोगों के सामने प्रस्तुत करने का आत्मविश्वास विकसित होगा।
हर विद्यालय को मिलेंगे 6,500 रुपये
बैगलेस डे की गतिविधियों के संचालन के लिए प्रत्येक विद्यालय को 6,500 रुपये की धनराशि दी जाएगी। इसके लिए प्रदेश स्तर पर कुल 28.94 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं। इस राशि का उपयोग गतिविधियों के संचालन और आवश्यक सामग्री की व्यवस्था के लिए किया जा सकेगा। इसका उद्देश्य यह है कि बैगलेस डे केवल कागजों तक सीमित न रहे, बल्कि बच्चों को वास्तविक रूप से गतिविधियों में भाग लेने का अवसर मिले इस पूरी पहल को सफल बनाने में शिक्षकों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होगी। शिक्षक यदि गतिविधियों को केवल औपचारिकता के रूप में कराने के बजाय बच्चों को उनका उद्देश्य समझाकर कराएं तो इसका प्रभाव कहीं अधिक अच्छा हो सकता है। उदाहरण के लिए यदि बच्चों को किचन गार्डन तैयार कराया जा रहा है तो उन्हें केवल पौधे लगाने तक सीमित न रखा जाए, बल्कि मिट्टी, पानी, खाद, पौधों की देखभाल और पर्यावरण के बारे में भी बताया जाए। इसी तरह विज्ञान मॉडल बनाते समय उसके पीछे छिपे वैज्ञानिक सिद्धांत को समझाना जरूरी होगा।
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों को दिए निर्देश
महानिदेशक, स्कूल शिक्षा एवं राज्य परियोजना निदेशक की ओर से सभी जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों को इस कार्यक्रम का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। इसका उद्देश्य यह है कि प्रदेश के सभी संबंधित विद्यालयों में बैगलेस डे को सही तरीके से लागू किया जाए और अधिक से अधिक बच्चों को गतिविधियों में भाग लेने का अवसर मिले। यदि विद्यालय स्तर पर शिक्षकों, अधिकारियों और अभिभावकों का सहयोग मिलता है, तो यह पहल बच्चों के सीखने के तरीके में सकारात्मक बदलाव ला सकती है।
बैगलेस डे से बच्चों को क्या फायदा होगा?
बैगलेस डे का उद्देश्य बच्चों को पढ़ाई से दूर करना नहीं है, बल्कि पढ़ाई को ज्यादा रोचक और व्यावहारिक बनाना है। किताबों में मिलने वाला ज्ञान जरूरी है, लेकिन जीवन में उसका इस्तेमाल कैसे किया जाए, यह समझना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। जब बच्चे खुद कोई चीज बनाते हैं, किसी स्थान का भ्रमण करते हैं, पौधा लगाते हैं, विज्ञान मॉडल तैयार करते हैं या किसी स्थानीय कारीगर से उसका काम समझते हैं, तो उन्हें सीखने का अलग अनुभव मिलता है। यही अनुभव आगे चलकर उनके अंदर आत्मविश्वास, रचनात्मकता, समस्या समाधान और टीमवर्क जैसी क्षमताएं विकसित कर सकता है।